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Monday, July 22, 2019

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करंट युक्त चालक में चुम्बकीय बाल रेखाओ की दिशा ज्ञात करने के लिए दो नियम प्रयोग किये जाते है -
1 Right hand thumb rule
2 Cork screw rule
दायें हाथ के अंगूठे का नियम - किसी करंट युक्त कंडक्टर को दायें हाथ से इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा विधुत धरा की दिशा में रहे तो अंगूठा मैग्नेटिक फ्लक्स की दिशा को दर्शायेगा ।

कॉर्क स्क्रू रूल - किसी करंट युक्त चालक के एक सिरे पर बोतल की कारक खोलने वाले पेच की नोक विधुत धरा की दिशा में खोला जाये तो पेच के खोलने की दिशा ही करंट युक्त कंडक्टर में चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा होगी ।

एम्पियर का नियम - एम्पियर का नियम ओवर हेड लाइनों में करंट की दिशा ज्ञात करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है । यह नियम वैज्ञानिक साइसदन एम्पियर ने बनाया था ।

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ओह्म का नियम - किसी सर्किट में बहने वाला करंट उस सर्किट को दी जाने वाली वोल्टेज के समानुपाती के समानुपाती होता है परंतु यह तभी संभव है जब सर्किट की भौतिक अवस्थाएं जैसे ताप क्रम इत्यादि न बदले ।

किरचौफ का नियम - किरचौफ का नियम वहां इस्तेमाल होता है जहाँ पर ओह्म के नियम के द्वारा विभिन्न विभिन्न चालकों में बहने वाले करंट का मान तथा कई मिले जुले प्रतितोधों का कुल प्रतिरोध ज्ञात नहीं किया जासकता हो । किरचौफ के 2 नियम है ।

ताप गुणांक - किसी प्रदार्थ के प्रतिरोध में 0 डिग्री C से 1 डिग्री C ताप क्रम बढ़ने पर प्रति ओह्म जो अंतर आता है वह उस प्रदार्थ का तापगुणांक कहलाता है ।

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प्रतिरोध प्रदार्थ का वह गुण है जो विधुत धरा के मार्ग में रूकावट उत्पन्न करता है । रेजिस्टेंस की इकाई ओह्म है और इसे R से दर्शाते है । प्रतिरोध को नापने के लिए ओह्म मीटर का प्रयोग किया जाता है । प्रतिरोध क्सहलक के क्षेत्र के विलोमनुपति होता है तथा चालक की लम्बाई के समानुपाती 

विशिस्ट प्रतिरोध - किसी भी प्रदार्थ के 1 सेंटी मीटर लंबे 1 सेंटी मीटर चौडे और 1 सेंटी मीटर मोटे घन की किन्ही दो समान्तर सतहों के बीच का प्रतिरोध उस प्रदार्थ का विशिष्ट प्रतिदोध कहलाता है ।

conductance- चालकता प्रदार्थ का वह गुण है जो विधुत धरा को बहने में सहायता प्रदान करता हैै ।

विशिस्ट चालकता - किसी भी प्रदार्थ के 1 सेंटी मीटर लंबे 1 सेंटी मीटर चौडे और 1 सेंटी मीटर मोटे घन की किन्ही दो समान्तर सतहों के बीच का चालकता उस प्रदार्थ का विशिष्ट चालकता कहलाती है ।

प्रतिरोधक - जब किसी प्रदार्थ के टुकड़े या उससे बने तार के एक अंश को एक निश्चित प्रतिरोध मान प्रस्तुत करने वाले कम्पोनेन्ट का रूप दे दिया जाये त प्रतिरोधक कहलाता है । Resistor 2 प्रकार के होते है -
1 कार्बन प्रतिरोधक
2 वायर वाउंड प्रतिरोध

प्रतिरोध प्रदार्थ का गुण है तथा प्रतिरोधक प्रदार्थ से बना कम्पोनेन्ट है ।
वह प्रदार्थ जो अपने में से विधुत धरा को बहने न दे इंसुलेटर कहलाता है । जैसे पोर्सलीन, बैकलाइट, तथा रबड़ इत्यादि ।

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चालक ( कन्डक्टर ) - वह प्रदार्थ जिससे इलेक्ट्रिक करंट आसानी से गुजर सके चालक कहलाता है । जिन चालकों पर विधुत प्रतिरोधक प्रदार्थों की एक या एक से अधिक परत चढ़ी होती है उन्हें इन्सुलेटिड कंडक्टर कहते है ।

अर्द्धचालक - सेमि कंडक्टर - वह प्रदार्थ जो न तो अच्छे चालक होते है और न ही अच्छे कुचालक सेमि कंडक्टर कहलाते है । यह कम कम ताप पर चालक की भांति कार्य करते है और अधिक तापमान पर कुचालक बन जाते है । यह एक प्रतिरोधक एलॉय तथा मिश्रित एलॉय है ।

एक अच्छे चालक में निम्न लिखित गुण विद्यामान होने चाहिए -

1 कम विशिष्ट प्रतिरोध ।2 जंग के प्रभाव से मुक्त ।3 चादर बनाने योग्य ।4 अधिक यांत्रिक शक्ति ।5 अधिक गलनांक बिंदु ।6 आसानी से उपलब्धता ।7 कम कीमत ।8 तार खीचने योग्य ।9 सोल्डर किये जाने योग्य ।10 प्रचुर मात्राप्रथम 5 अधिक चालकता वाले चालक -1 चांदी2 ताँबा3 सोना4 एल्युमीनियम5 ज़िंक

कुछ अर्द्धचालकों की बनावट -

1 यूरेका - 40% निकल 60% ताँबा2 नाइक्रोम - 80% निकल 20% क्रोमिय3 मैग्नीन - 84% ताम्बा 12% मैग्निन 4% निकल4 जर्मन सिल्वर - 60% ताम्बा 15% निकल 25% जिंक ।5 कैंथोल - 50% क्रोमियम 30% निकल 20% आयरन ।6 प्लैटिनाइड - 64% ताँबा 15% निकल 20% ज़िंक 1% टंगस्टन7 कार्बन - कार्बन एक ऐसी धातु है जिसकी सपैसिफिक रेजिस्टेंस अधिक होती है और इसकी रेजिस्टेंस तापमान बढ़ने पर घटती है और तापमान घटने पर बढ़ती है ।

अर्धचालकों के गुण -

1 अर्द्धचाक हलके तथा छोटे होते है ।2 दक्षता अधिक होती है ।3 वातावरण के प्रभाव से मुक्त होते है ।4 कम विधुत खर्च करते है ।

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कैपेसिटर / कन्डेन्सर - जब दो चालक प्लेटों को किसी कुचालक माध्यम से इस प्रकार पृथक किया जाये कि वह विधुत क्षेत्र स्थापित करने में सक्षम हो तो वह कपैसिटर कहलाता है । कपैसिटर की इकाई फैरेड है इसे f से दर्शाते है । प्लेटों का आकार अधिक होने से केपैसिटर अधिक चार्ज एकत्रित करेगा । और प्लेटों के बीच की दूरी जितनी कम होती है धारिता उतनी ही अधिक होती है ।

कैपेसिटेंस - चार्ज या वोल्टेज के अनुपात को कैपेसिटेन्स कहते है ।

कैपेसिटर मुख्यतः दो प्रकार के होते है
1 fixed type capacitor .
2 variable type capacitor .
फिक्सड टाइप कैपपेसिटर - इन capacitors की धारिता को बदल कर कम या ज्यादा नहीं किया जा सकता । इस प्रकार के कैपेसिटर में माइका कैपेसिटर, सिरेमिक कैपेसिटर, पेपर कैपेसिटर, इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर आदि कैपेसिटर आते है ।

वेरियेवल कैपेसिटर - वे कैपेसिटर जिनके मान या धारिता को कम या जयादा किया जा सकता है वेरियेवल कैपेसिटर कहलाते है । जैसे कि अधिक कैपेसिटरों के प्रयोग से और ऐयर कैपेसिटर इत्यादि इसमें एयर कैपेसिटर के भी विभिन्न प्रकार है जैसे - Trimmer capacitor, Padder capacitor, gang capacitor etc etc .

कैपेसिटर का प्रयोग -

1 मोटरों में2 इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में3 पॉवर फैक्टर सुधारने में4 स्पार्किंग कम करने में5 चार्ज एकत्रित करने में

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बाल की परिभाषा - वह धक्का या खिंचाव जो किसी वस्तु की स्थिति बदल दे या बदलने की चेष्टा करे तो वह बल कहलाता है ।

Definition of work /कार्य की परिभाषा - जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाये और वह वस्तु अपनी स्थिति को बदल दे तो वह कार्य कहलाता है ।]

Definition of power / शक्ति की परिभाषा - कार्य करने की दर को शक्ति कहते है ।

Definition of energy / ऊर्जा की परिभाषा - कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते है ।

Definition of efficiency / दक्षता की परिभाषा - जब ऊर्जा वक स्थिति से दूसरी अवस्था में बदलती है तो कुछ ऊर्जा हानि के कारण नष्ट हो जाती है अर्थात मशीन की आउटपुट हमेशा ही इनपुट से कम होती है तथा नष्ट हुई ऊर्जा इनपुट व आउटपुट के आयर के समान होती है ।

Definition of heat / ऊष्मा की परिभाषा - ऊष्मा भी एक प्रकार की ऊर्जा है जिससे हमें गर्माहट का अनुभव होता है । ऊष्मा मापने की इकाई कैलोरी है ।

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स्थाई चुम्बक व अस्थाई चुम्बक में अन्तर -

अस्थाई चुम्बक का इस्तेमाल मोटरों, जनरेटरों, इत्यादि में होता है जबकि स्थाई चुम्बक का इस्तेमाल खिलौनो तथा स्पीकरों इत्यादि में होता है ।स्थाई चुम्बक दिशा ज्ञात कर सकते है जबकि अस्थाई चुम्बक से दिशा ज्ञात नहीं की जा सकती ।अस्थाई चुम्बक किसी भी आकार ने बनाये जा सकते है जबकि स्थाई चुम्बक कुछ खासा आकारों में ही बनाये जाते है ।स्थाई चुम्बक की शक्ति स्थिर होती है जबकि अस्थाई चुम्बक की शक्ति को कम या अधिक किया जासकता है ।स्थाई चुम्बक को बनाने में अधिक समय लगता है जबकि अस्थाई चुम्बक आसानी से बनाये जाते है ।स्थाई चुम्बक आसानी से अपनी चुम्बकीय शक्ति नहीं खोते जबकि अस्थाई चुम्बक के गुण आसानी से समाप्त किये जा सकते है ।स्थाई चुम्बक के पोलों को आसानी से बदला नहीं जा सकता है जबकि अस्थाई चुम्बक के पोलों को आसानी से बदला जा सकता है ।

Characteristics of magnetic lines / เคšुเคฎ्เคฌเค•ीเคฏ เคฌเคฒ เคฐेเค–ाเค“ं เค•ी เคตिเคถेเคทเคคाเคฏें

Characteristics of magnetic lines / चुम्बकीय बल रेखाओं की विशेषतायें -

चुम्बकीय बल रेखाएं सदैव बंद सर्किट बनती है ।चुम्बकीय बल रेखाएं चालक के तल में हमेशा लम्बवत निकलती व प्रवेश करती है ।चुम्बकीय बल रेखाएं सदैव उत्तर से दक्षिण की और चलती है ।चुम्बकीय बल रेखाएं सदैव छोटा रास्ता तेय करती है ।जहाँ चुम्बकीय बल अधिक होता है वहां चुम्बकीय बल रेखाएं भी अधिक होती है ।चुम्बकीय बल रेखाओं के रास्ते में कोई भी इंसुलेशन नहीं होता ।चुम्बकीय बल रेखाएं चुम्बकीय प्रदार्थ में सुगमता से गुजरती है ।चुम्बकीय बल रेखाएं सदैव समान दूरी पर रहती है ।चुम्बकीय बाल रेखाएं कभी एक दूसरी को काट नहीं सकती ।

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चुम्बकीय धातुओं का वर्गीकरण तीन भागों में किया जाता है -
Ferromagnetic substances / फेरोमैग्नेटिक प्रदार्थ - वह प्रदार्थ जी किसी चुम्बक की और तेजी से आकर्षित होते है उन्हें फेरो मैग्नेटिक प्रदार्थ कहते है । जैसे कि लोहा , निकल, कोबाल्ट ।

Paramagnetic substances / पैरामैग्नेटिक प्रदार्थ - वह प्रदार्थ जी किसी चुम्बक की और कम तेजी से आकर्षित होते है उन्हें परामैग्नेटिक प्रदार्थ कहते है जाइए कि ऐल्यूमिनियम, ताम्बा ।

Diamagnetic substances / डायामैग्नेटिक प्रदार्थ - वह प्रदार्थ जी किसी चुम्बक की आकर्षित नहीं होते है उन्हें डायामैग्नेटिक प्रदार्थ कहते है जैसे कि लकड़ी , कागज , प्लास्टिक ।

Difference between electric current and magnetic field - फ्लक्स की इकाई वेबर है जबकि करंट की इकाई एम्पीयर है ।

फ्लक्स एम.एम.ऑफ व रिलेक्टेन्स का अनुपात है । जबकि करंट वोल्टेज और रजिस्टेंस का अनुपात है ।रजिस्टेंस की इकाई ओह्म है जबकि रिलेक्टेस की इकाई एम्पियर टर्न प्रति वेबर है ।emf की इकाई वाल्ट है जबकि mmf की इकाई एम्पीयर टर्न है ।

Magnetic effect of electric current / เคตिเคงुเคค เคงเคฐा เค•े เคšुเคฎ्เคฌเค•ीเคฏ เคช्เคฐเคญाเคต

Magnetic effect of electric current / विधुत धरा के चुम्बकीय प्रभाव - जब किसी कंडक्टर में इलेक्ट्रिक करंट गुुजारा जाये तो कंडक्टर में मैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न हो जाती है इस प्रभाव को विधुत धारा का चुम्बकीय प्रभाव कहते है -
Properties and effects of electromagnet / इलेक्ट्रोमैगनेट( विधुत चुम्बक ) के गुण व प्रभाव -

1 आवश्यकता पड़ने पर इलेक्ट्रो मैगनेट आसानी से बनाया जा सकता है ।2 इलेक्ट्रोमैगनेट की पोलेरटी बदल सकते है ।3 विधुत चुम्बक की ताकत को बढ़ाया या घटाया जा सकता है ।4 विधुत चुम्बक को किसी भी आकर में बनाया जा सकता है ।5 इच्छा अनुसार जितना समय आवश्यकता हो इलेक्ट्रो मैगनेट बना सकते है ।6 सभी प्रकार की इलेक्ट्रिक मशीनों में विधुत चुम्बक का इस्तेमाल होता है जैसे कि जनरेटरों, मोटरों, ट्रांसफॉर्मरों, मापन इंस्ट्रूमेंट व अन्य इलेक्ट्रिकल डिवाइस इत्यादि ।

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